मस्तिष्क के लिए अधिक अनुकूलित इंटरफ़ेस

Penn State के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने ब्रेन-सतह सेंसरों के लिए एक नया तरीका प्रस्तुत किया है, जो तंत्रिका निगरानी को अधिक व्यक्तिगत बना सकता है। दिए गए स्रोत पाठ के अनुसार, टीम ने ऐसे नरम बायोइलेक्ट्रोड विकसित किए हैं जिन्हें 3D प्रिंट किया जा सकता है, खींचा जा सकता है, और मोड़ा जा सकता है ताकि वे मरीज के मस्तिष्क की ज्यामिति के अनुरूप बैठें, बजाय इसके कि मस्तिष्क को किसी मानक डिवाइस आकार के अनुरूप होने के लिए मजबूर किया जाए।

यह काम तंत्रिका इंटरफ़ेस की एक लगातार बनी रहने वाली समस्या को संबोधित करता है। पारंपरिक बायोइलेक्ट्रोड अक्सर अपेक्षाकृत कठोर पदार्थों से बनाए जाते हैं और एक-आकार-सबके-लिए वाले प्रारूप में होते हैं। यह मस्तिष्क की मुड़ी हुई सतह के लिए खराब मेल हो सकता है, जहाँ उभारों और खाँचों में मामूली अंतर भी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में काफी बदलते हैं।

इसके परिणामस्वरूप एक डिज़ाइन चुनौती बनती है जिसके वास्तविक नैदानिक प्रभाव हैं। यदि कोई सेंसर ऊतक के साथ निकट और स्थिर रूप से नहीं बैठता, तो दर्ज संकेतों की गुणवत्ता घट सकती है। लंबे समय में, खराब फिट न्यूरोलॉजिकल रोगों के लिए अधिक प्रभावी निगरानी या उत्तेजना प्रणालियाँ बनाने के प्रयासों को भी जटिल बना सकता है।

मस्तिष्क को फिट करना कठिन क्यों है

मानव मस्तिष्क की बाहरी cortical sheet gyri और sulci में मुड़ती है, जिससे एक सघन लेकिन बहुत अनियमित सतह बनती है। स्रोत पाठ बताता है कि बड़े folds अलग-अलग लोगों में मोटे तौर पर समान होते हैं, लेकिन उनकी सटीक व्यवस्था व्यक्ति-दर-व्यक्ति काफी बदलती है। इसका अर्थ है कि एक मानक डिवाइस आकार एक मरीज पर अच्छी तरह बैठ सकता है और दूसरे पर खराब।

इसे हल करने के लिए शोध दल ने 21 मानव मरीजों के MRI-आधारित डेटा का उपयोग करके विस्तृत मस्तिष्क संरचनाओं का अनुकरण किया। फिर उन्होंने उन संरचनाओं के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए इलेक्ट्रोड बनाए और परीक्षण के लिए 3D प्रिंटेड इलेक्ट्रोड और भौतिक मस्तिष्क मॉडल दोनों तैयार किए।

यह कार्यप्रणाली इसलिए अलग दिखती है क्योंकि यह personalization को manufacturing प्रक्रिया का हिस्सा बना देती है। पहले से बने सीमित implant shapes में से चुनने के बजाय, शोधकर्ता anatomy से शुरुआत कर सकते हैं और डिवाइस को उसी के चारों ओर बना सकते हैं।

हनीकॉम्ब डिज़ाइन और इसका समाधान

उम्मीदवार पाठ नरम इलेक्ट्रोड्स में honeycomb-प्रेरित संरचना को रेखांकित करता है। यह डिज़ाइन stretchability और structural strength दोनों को बनाए रखने के लिए है, ताकि डिवाइस सतह के अनुरूप बने रहते हुए electrical और physiological संकेतों के प्रति संवेदनशील भी बना रहे।

यह संयोजन महत्वपूर्ण है। बायोइलेक्ट्रॉनिक्स में नरम डिवाइस अक्सर एक trade-off का सामना करते हैं: उन्हें जीवित ऊतक के अनुरूप बनाने के लिए पर्याप्त लचीला बनाइए और वे मजबूती खो सकते हैं, या उन्हें मज़बूत बनाइए और वे अंग के लिए अच्छे यांत्रिक मेल जैसे नहीं रह जाते। Penn State-नेतृत्व वाले काम का लक्ष्य इसी trade-off को सीधे संबोधित करना है।

शोधकर्ताओं ने Advanced Materials में रिपोर्ट किया कि printed electrodes rat tests में जैव-संगत और प्रभावी रहते हुए पारंपरिक डिज़ाइनों की तुलना में मस्तिष्क संरचना के साथ बेहतर बैठे। दिए गए सामग्री के आधार पर, केंद्रीय तकनीकी दावा यही है: कार्यात्मक प्रदर्शन से समझौता किए बिना बेहतर फिट।

यह आगे कहाँ जा सकता है

तत्काल लाभ बेहतर तंत्रिका निगरानी है। यदि इलेक्ट्रोड मरीज की cortical anatomy के साथ अधिक निकटता से मेल खा सकें, तो चिकित्सक और शोधकर्ता अधिक स्पष्ट संकेत पकड़ सकते हैं और संभवतः समय के साथ अधिक स्थिर इंटरफ़ेस बनाए रख सकते हैं। यह neurodegenerative disease की निगरानी, मस्तिष्क गतिविधि के अध्ययन, और अगली पीढ़ी की neurotechnology के निर्माण के लिए प्रासंगिक है।

स्रोत पाठ इस काम को विशेष रूप से neurodegenerative disease की निगरानी और उपचार से जोड़ता है। भले ही प्रयोगशाला अध्ययन से नैदानिक उपयोग तक की राह लंबी हो, डिज़ाइन का तर्क आकर्षक है। Personalization ने orthopedics और oncology जैसे क्षेत्रों को बदल दिया है। तंत्रिका इंटरफ़ेस भी शायद उसी मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ डिवाइस ज्यामिति जनसंख्या के औसत के बजाय मरीज के अनुसार तय की जाती है।

एक manufacturing angle भी है। 3D printing चिकित्सा-उपकरण विकास में इसलिए आकर्षक है क्योंकि यह हर variation के लिए पूरी नई tooling की आवश्यकता के बिना जटिल ज्यामिति को संभाल सकती है। ब्रेन-सतह उपकरण ठीक वही उत्पाद श्रेणी हैं जहाँ यह लचीलापन मूल्यवान हो जाता है।

व्यापक महत्व

यह अध्ययन materials science, biomedical engineering, और precision medicine के संगम पर स्थित है। यह कठोर implants से हटकर नरम, ऊतक-संगत प्रणालियों की ओर बड़े बदलाव को दर्शाता है, जिन्हें शरीर के भीतर यांत्रिक असमानता कम करने के लिए बनाया जाता है।

यह प्रवृत्ति तंत्रिका तंत्र में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहाँ फिट और signal fidelity में छोटे सुधार भी इस बात पर बड़ा असर डाल सकते हैं कि डिवाइस वास्तव में क्या माप सकता है। जितना बेहतर कोई इंटरफ़ेस anatomy का सम्मान करता है, उतना ही अधिक यथार्थवादी यह बनता है कि निगरानी प्रणालियाँ अधिक सटीक और कम विघटनकारी हों।

दिए गए स्रोत में यह दावा नहीं किया गया है कि ये इलेक्ट्रोड नियमित मानव उपयोग के लिए तैयार हैं, और इसे ऐसा पढ़ा भी नहीं जाना चाहिए। जो दिखाया गया है, वह patient-specific neural hardware की दिशा में एक भरोसेमंद कदम है: MRI-आधारित डिज़ाइन, 3D-प्रिंटेड नरम इलेक्ट्रोड, मस्तिष्क संरचना के साथ बेहतर अनुरूपता, और उत्साहजनक संगतता परिणाम।

एक ऐसे क्षेत्र के लिए जो सामान्यीकृत brain interfaces से अधिक सटीक प्रणालियों की ओर बढ़ना चाहता है, यह एक महत्वपूर्ण विकास है। मूल विचार सरल और शक्तिशाली है: अगर हर मस्तिष्क थोड़ा अलग है, तो डिवाइस भी अलग होना चाहिए।

यह लेख Medical Xpress की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.

Originally published on medicalxpress.com