सार्डिनिया का ऊर्जा संघर्ष सिर्फ टरबाइनों और पैनलों के बारे में नहीं है

सार्डिनिया को अक्सर मजबूत नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वाली जगह के रूप में देखा जाता है, लेकिन पवन और सौर विकास के प्रति द्वीप का हालिया प्रतिरोध दिखाता है कि जब सामाजिक वैधता टूट जाती है, तो स्वच्छ-ऊर्जा संक्रमण विफल हो सकते हैं। स्रोत सामग्री के अनुसार, जमीनी स्तर का विरोध इतना व्यापक हो गया कि 2024 में दो महीनों के भीतर नए पवन और सौर प्रोजेक्टों पर प्रतिबंध के समर्थन में 2,10,000 से अधिक प्रमाणित हस्ताक्षर जुटाए गए। राजनीतिक नेताओं ने नवीकरणीय-ऊर्जा निर्माण पर 18 महीने की रोक के साथ प्रतिक्रिया दी।

इस स्तर की लामबंदी अपने आप में उल्लेखनीय है। स्रोत के अनुसार, हस्ताक्षरों की संख्या सार्डिनिया में आम मतदान-भागीदारी के एक चौथाई से अधिक थी और इसमें दल-पार समर्थन झलकता था। दूसरे शब्दों में, यह कोई सीमांत विरोध आंदोलन या किसी एक वैचारिक खेमे तक सीमित एक मुद्दा-आधारित अभियान नहीं था। यह बाहरी डेवलपरों और, व्यापक रूप से, बाहरी सत्ता के प्रति अविश्वास की एक व्यापक अभिव्यक्ति थी।

रुकावट सामाजिक है, तकनीकी नहीं

यह लेख स्थानीय हस्ती फ़ैब्रिज़ियो पीलो, जो एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं, और साहित्यिक समाजशास्त्री एलिसा सोटगियू के साथ बातचीत के जरिए इस संघर्ष को प्रस्तुत करता है; दोनों बाहरी लोगों के प्रति गहरी सांस्कृतिक आशंका की ओर इशारा करते हैं। यही अविश्वास कई सार्डिनियावासियों के लिए नवीकरणीय-ऊर्जा प्रस्तावों की व्याख्या को आकार देता दिखता है। पवन और सौर परियोजनाओं को मुख्य रूप से जलवायु या औद्योगिक बुनियादी ढांचे के रूप में देखने के बजाय, बहुत से निवासी उन्हें दोहन, उपेक्षा, और कहीं और से थोपे गए फैसलों के लंबे इतिहास के संदर्भ में देखते हैं।

यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ऊर्जा संक्रमण पर बहसें अक्सर तकनीकी अनुकूलन की समस्याओं के रूप में पेश की जाती हैं: बुनियादी ढांचा कहाँ लगाया जाए, उसे कैसे जोड़ा जाए, उसका वित्तपोषण कैसे हो, और उसे कितनी तेजी से बनाया जाए। सार्डिनिया का मामला बताता है कि यदि स्थानीय आबादी यह नहीं मानती कि परियोजनाएँ उनके लाभ के लिए विकसित की जा रही हैं, तो ये प्रश्न गौण हो जाते हैं। अत्यधिक अनुकूल तकनीक भी तब प्रतिरोध पैदा कर सकती है जब वह बाहरी नियंत्रण या कथित शोषण से जुड़ जाती है।

यहाँ पुरातत्व, पहचान और भूमि-उपयोग सब टकराते हैं

स्रोत में उल्लेख है कि सार्डिनिया की सरकार ने एक कानून पारित किया था, जिसके तहत नुराघी जैसी पुरातात्विक अवशेषों से सात किलोमीटर के भीतर पवन टरबाइनों पर प्रतिबंध लगाया गया था, जो द्वीप की कांस्य-युग की सूखापत्थर संरचनाएँ हैं। बाद में उस कानून को इटली की राष्ट्रीय सरकार ने निरस्त कर दिया। कानूनी गुण-दोषों को अलग रख भी दें, तो यह घटना दांव पर लगी मूल्यों की प्रकृति को दिखाती है। सार्डिनिया में ऊर्जा बुनियादी ढांचा किसी खाली परिदृश्य में प्रवेश नहीं कर रहा। वह इतिहास, प्रतीकवाद और पहचान से भरे परिदृश्य में प्रवेश कर रहा है।

जब विकास प्रस्तावों को उन जगहों पर रखा जाता है जिन्हें सांस्कृतिक रूप से अपूरणीय माना जाता है, तो विरोध तेजी से तीव्र हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि स्वच्छ-ऊर्जा निर्माण असंभव है। इसका मतलब यह है कि साइट चयन की राजनीति अपनत्व और संरक्षण के सवालों से अलग नहीं की जा सकती। कई विरोधियों के लिए मुद्दा यह नहीं है कि डीकार्बोनाइज़ेशन महत्वपूर्ण है या नहीं, बल्कि यह है कि द्वीप को कौन और किन शर्तों पर पुनर्गठित कर सकता है।

कोयला पृष्ठभूमि में मौजूद है, और यथास्थिति का लाभार्थी बना रहता है

इस कहानी की विडंबना यह है कि नवीकरणीयों को रोक देने से सार्डिनिया किसी पर्यावरण-तटस्थ स्थिति में नहीं ठहरता। स्रोत द्वीप को कोयले पर अटका हुआ बताता है। यही इस संघर्ष को केवल सार्डिनिया तक सीमित न रहकर और भी महत्वपूर्ण बनाता है। यूरोप और अन्य जगहों पर भी, कम भरोसे वाले नवीकरणीय विकास के प्रति विरोध, डिफ़ॉल्ट रूप से, पुराने और अधिक कार्बन-गहन प्रणालियों को बनाए रख सकता है।

यह एक ऐसा बिंदु है जिसे ऊर्जा नीति की चर्चाएँ कभी-कभी कम आँकती हैं। किसी विशिष्ट परियोजना का विरोध सिर्फ एक स्थानीय योजना-परिणाम नहीं है। समग्र रूप से, यह डीकार्बोनाइज़ेशन की गति को प्रभावित करता है और जीवाश्म परिसंपत्तियों पर निर्भरता को लंबा खींच सकता है। यदि अविश्वास नई उत्पादन क्षमता के निर्माण को रोक देता है, तो विरासत प्रणाली को समय मिल जाता है।

व्यापक स्वच्छ-ऊर्जा संक्रमण के लिए एक चेतावनी

सार्डिनिया का अनुभव उन सरकारों और डेवलपरों के लिए एक सावधानीपूर्ण सबक है जो मान लेते हैं कि जलवायु लक्ष्य स्वतः ही सार्वजनिक वैधता दे देते हैं। ऐसा नहीं है। कोई परियोजना सैद्धांतिक रूप से पर्यावरण के लिए बेहतर हो सकती है और फिर भी राजनीतिक रूप से विफल हो सकती है, यदि स्थानीय समुदायों को लगे कि उन्हें शामिल करने के बजाय इस्तेमाल किया जा रहा है। स्रोत सार्वजनिक चौकों में लगी लंबी कतारों का वर्णन करता है, जहाँ निवासी याचिका पर हस्ताक्षर कर रहे थे। वह दृश्य दिखाता है कि यह मुद्दा कितना भावनात्मक हो गया था।

निजी पूंजी, राष्ट्रीय नीति और जलवायु-तत्कालता शक्तिशाली बल हैं, लेकिन वे स्थानीय स्मृति को मिटा नहीं देते। जहाँ समुदाय बाहरी लोगों के बारे में लंबे समय से चली आ रही शिकायतें रखते हैं, वहाँ बुनियादी ढांचा संप्रभुता, न्याय और मान्यता पर कहीं बड़े तर्कों का प्रतीक बन जाता है। जब तक कोई परियोजना औपचारिक समीक्षा तक पहुँचती है, तब तक वे गहरे विवाद परिणाम को पहले ही निर्धारित कर चुके होते हैं।

सार्डिनिया वास्तव में क्या दिखा रहा है

द्वीप का नवीकरणीय-ऊर्जा संघर्ष जलवायु-शंका की एक सरल कहानी नहीं है। यह उन राजनीतिक परिस्थितियों की कहानी है जो डीकार्बोनाइज़ेशन को आगे बढ़ने के लिए आवश्यक हैं। स्वच्छ-ऊर्जा प्रणालियों को फिर भी भूमि घेरनी होती है, नज़ारों को बदलना होता है, विरासत से जुड़ना होता है, और लाभों को असमान रूप से बाँटना होता है। यदि इस प्रक्रिया को शोषणकारी माना जाए, तो उन जगहों पर भी विरोध भारी हो सकता है जहाँ संक्रमण के लिए आर्थिक और पर्यावरणीय तर्क मजबूत दिखते हैं।

इसलिए सार्डिनिया ऊर्जा नीति के अगले चरण के लिए एक केस स्टडी के रूप में महत्वपूर्ण है। चुनौती अब सिर्फ़ साफ़ तकनीकें ईजाद करने या उनके लिए वित्त जुटाने की नहीं है। चुनौती उन्हें ऐसे तरीके से बनाना है जिन्हें समुदाय वैध मानें। जहाँ वह वैधता अनुपस्थित है, वहाँ अत्यावश्यक संक्रमण योजनाएँ भी ठहर सकती हैं। और जब वे ठहरती हैं, तो पुरानी प्रणाली बनी रहती है।

सार्डिनिया से यही कठिन सबक मिलता है: डीकार्बोनाइज़ेशन सिर्फ़ एक इंजीनियरिंग परियोजना नहीं है। यह भरोसे की परियोजना है। इसके बिना, स्वच्छ-ऊर्जा भविष्य को वही लोग टाल सकते हैं, जिनकी सेवा के लिए वह बनाया जा रहा है।

यह लेख IEEE Spectrum की रिपोर्टिंग पर आधारित है। मूल लेख पढ़ें.

Originally published on spectrum.ieee.org