एक छोटा अध्ययन सुझाव देता है कि शरीर सिर पर चोटों को केवल मस्तिष्क से परे भी दर्ज कर सकता है

खेल-संबंधी मस्तिष्क चोट को लेकर लंबे समय से चल रही बहस आम तौर पर लक्षणों, स्कैनों या न्यूरोकॉग्निटिव परीक्षणों में दिखने वाली बातों पर केंद्रित रहती है। एक नया अध्ययन एक बिल्कुल अलग संकेत की ओर इशारा करता है: आंत। अमेरिकी कॉलेज फ़ुटबॉल खिलाड़ियों के एक छोटे समूह पर नज़र रखने वाले शोधकर्ताओं ने पाया कि गैर-कंश्यिव सिर पर चोटों के बाद कुछ ही दिनों में आंत माइक्रोबायोम में मापनीय बदलाव हुए।

यह निष्कर्ष यह साबित नहीं करता कि सब-कंश्यिव प्रहार सीधे माइक्रोबायोम में गड़बड़ी पैदा करते हैं। लेकिन यह इस बात की एक दिलचस्प नई दिशा खोलता है कि क्या वे बार-बार लगने वाले प्रहार, जो निदान योग्य कंशन नहीं बनते, फिर भी शरीर में कहीं और पहचाने जा सकने वाले जैविक निशान छोड़ सकते हैं।

सब-कंश्यिव प्रभाव क्यों महत्वपूर्ण हैं

अमेरिकन फ़ुटबॉल में खिलाड़ी एक सीज़न के दौरान सिर पर बड़ी संख्या में चोटें सह सकते हैं, भले ही वे कंशन के नैदानिक मानदंड तक न पहुँचें। अध्ययन के अनुसार, एथलीटों को ऐसे 100 से 1,000 तक प्रहार झेलने पड़ सकते हैं। यही कारण है कि संचयी जोखिम को समझने की कोशिश कर रहे वैज्ञानिकों के लिए सब-कंश्यिव एक्सपोज़र लगातार चिंता का विषय रहा है।

पहले के शोध यह दिखा चुके थे कि पूर्ण कंशन आंत माइक्रोबायोम को बाधित कर सकते हैं, जो सूजन और न्यूरोइम्यून प्रतिक्रिया से जुड़ी एक जटिल प्रणाली है। अब तक यह नहीं देखा गया था कि कमतर प्रभाव भी ऐसे ही बदलाव पैदा कर सकते हैं या नहीं।

PLOS One

में प्रकाशित नए काम का उद्देश्य इसी संभावना को परखना था।